हिंदी दिवस एंकरिंग | Hindi Diwas Anchoring Script in Hindi

दोस्तों, इस पोस्ट में हम आपको Hindi Diwas Anchoring Script in Hindi देने जा रहे हैं, आप इसे नीचे पढ़ सकते हैं और आप यहां से 15 August Anchoring Script in Hindi पढ़ सकते हैं।

 

 

 

Hindi Diwas Anchoring Script in Hindi

 

 

 

 

 

 

सुमन जोशी – कक्षा 10 की छात्रा तथा हिंदी दिवस की मंच संचालिका, उद्घोषिका।

 

 

मंचासीन – प्रमोद गौड़ (प्रधानाचार्य शारदा इंटर कॉलेज)

 

 

स्थान – शारदा इंटर कॉलेज का सभा स्थल, मंच पर प्रमोद गौड़ के साथ अन्य शिक्षक गण।

 

 

मुख्य अथिति – बेदव्यास महाविद्यालय के प्रधानाचार्य ‘आलोक शर्मा’

 

 

सुमन जोशी (लाऊड स्पीकर पर उद्घोष करते हुए) – सर्वप्रथम मैं यहां मंचासीन गणमान्य व्यक्तियों तथा प्रधानाचार्य, गुरुजनो के साथ ही हिंदी दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री आलोक शर्मा जी का 14 सितंबर के दिन हिंदी दिवस के पावन अवसर पर सभी लोगो को सादर नमस्कार करती हूँ।

 

 

(कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए)

 

 

यहां उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों तथा अपने स्कूल के साथियो, सहपाठियों के समक्ष मैं यह कहने का प्रयास करती हूँ कि – भारत के इतिहास में कई साहित्यकारों, समाजसेवियों, संतो और राजनेताओ ने हिंदी भाषा के उत्थान के लिए अपने सार्थक लेखन कला, विचार प्रवाह से तथा शिक्षा साधना से पूर्ण प्रयास किया तथा अनवरत करते आ रहे है।

 

 

 

परन्तु मुझे प्रकृति के सुकुमार कवि कहे जाने, सुमित्रा नंदन पंत जी की लेखन कला ने बहुत प्रभावित किया है। आप सभी गणमान्य जन था साथियो सहपाठियों ने भी सुमित्रा नंदन पंत जी को अवश्य पढ़ा होगा। उनकी रचना को पढ़ते ही आँखों के सामने प्रकृति के सुंदर, सौम्य दृश्य उपस्थित हो जाते है।

 

 

 

परन्तु खेद का विषय है कि इस भारत देश के अभिजात्य वर्ग कहे जाने वाल लोग हिंदी भाषा के प्रसार और प्रचार के लिए प्रतिवर्ष ‘हिंदी दिवस’ का पूर्ण उत्साह के साथ आयोजन तो करते है परन्तु आयोजन के समाप्त होते ही उनकी कथनी और करनी में स्पष्ट रूप से अंतर परिलक्षित होने लगता है जो इस बात का द्योतक है कि कथनी और करनी में अंतर रखना हमारी नियति बन गयी है।

 

 

 

(सभा स्थल पर उपस्थित छात्र छात्राओं द्वारा करतल ध्वनि)

 

 

सुमन जोशी – आप सभी का हमारा उत्साह वर्धन करने लिए धन्यवाद, अब मैं मंचासीन प्रधानाचार्य श्री प्रमोद गौड़ तथा ‘हिंदी दिवस’ के मुख्य अतिथि बेदव्यास महाविद्यालय के प्रधानाचार्य ;श्री आलोक शर्मा जी’ से सादर अनुरोध करती हूँ कि वीणा वादिनी देवी सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए दिप प्रज्वलित करे जिससे ‘हिंदी दिवस’ के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का अवसर मिले।

 

 

(माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के समय करतल ध्वनि)

 

 

सुमन जोशी – दीप प्रज्वलन के बाद अब मुख्य अतिथि तथा सभी मनीषी गुरुजनो के सम्मान में स्वागत गीत प्रस्तुत करने के लिए कक्षा 7 पांच छात्राओ को इस मंच पर आने का अनुरोध करती हूँ आप लोग यथा शीघ्र आने का कष्ट करे।

 

 

(स्वागत गीत के समापन के बाद करतल ध्वनि से स्वागत)

 

 

सुमन जोशी – साथियो, सहपाठियों तथा सभी सम्मानित लोगो आप सभी लोगो को यह अवश्य ज्ञात होगा कि जब किसी शिशु का जन्म होता है तो उसके लिए माता जो प्रथम शब्द प्रयोग करती है वह यह मेरा प्यारा बच्चा, मेरी प्यारी गिडिया रानी, मेरा प्यारा राज बेटा आदि। यह सभी शब्दों को हिंदी में उच्चारित किया जाता है।

 

 

 

जब हम एक वैज्ञानिक, अध्यापक, इंजीनियर आदि होते हुए सोचने की प्रतिक्रिया करते है तो स्वाभाविक रूप से मातृभाषा का ही सहयोग लेना पड़ता है न कि किसी अन्य भाषा का। मातृभाषा में ही सोचने, समझने के बाद  किसी अन्य भाषा में परिभाषित किया जा सकता है।

 

 

 

तो मेरा आप सभी लोगो से विनम्र आग्रह है कि अपनी मातृभाषा हिंदी की उपेक्षा क्यों और किसलिए हो रही है। यह हम सभी के सामने यक्ष प्रश्न है? हम लोगो के भीतर, बाहर चाहे कितनी आधुनिकता आ जाये किन्तु यह दृढ सत्य है कि हमारे अंदर की भाषायी सुगंध कभी कम नहीं हो सकती है अतः हम इस भाषायी सुगंध के साथ ‘हिंदी दिवस’ कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का प्रयास करते है।

 

 

 

(अतिथि और मुख्य अतिथि का स्वागत)

 

 

सुमन जोशी – मैं आपके समक्ष ‘हिंदी दिवस’ कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रसन्नता और प्रतिबद्धता के साथ मंचासीन माननीय अतिथियों के स्वागत के लिए हिंदी भाषा के प्रति समर्पित मनीषी ‘आलोक शर्मा, प्रमोद गौड़ जी’ के साथ अन्य सम्मानित गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत हेतु हमारे विद्यालय की कक्षा 9 की छात्राओं और उनके साथियो से अनुरोध करती हूँ कि मंच पर आकर गणमान्य मनीषी जनो का पुष्पगुच्छ और रोली चंदन से अभिनंदन वंदन करे।

 

 

 

सम्मान कार्यक्रम के इस क्रम में मैं अपने विद्यालय के कनिष्ठ गुरुजनो से वरिष्ठ गुरुजनो के स्वागत का अनुरोध करती हूँ कि आप सभी कनिष्ठ गुरुजन मंच पर आकर वरिष्ठ गुरुजनो का स्वागत सम्मान परिपूर्ण करे।

 

 

 

(मंच पर कनिष्ठ शिक्षकों द्वारा वरिष्ठ शिक्षकों और अतिथियों का सम्मान, करतल ध्वनि)

 

 

सुमन जोशी – आप सभी की गरिमामय उपस्थिति के कारण ही ‘हिंदी दिवस’ का सफल आयोजन पूर्ण हो सका। यह मेरा परम सौभाग्य है कि इतने महान मनीषी जनो के समक्ष मुझे ‘हिंदी दिवस’ के संचालन का अवसर प्राप्त हुआ आप सभी के सहयोग के लिए आप सभी को हार्दिक धन्यवाद के साथ ही हिंदी दिवस के आयोजन को समाप्त किया जाता है धन्यवाद।

 

 

 

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